माँ एक एहसास
*माँ एक एहसास*
माँ एक एहसास है,
चलती धूप में परछाई की तरह साथ है.
जब भी मैंने खुद को अकेला पाया है, साथ खड़ा हमेशा माँ का साया पाया है..
यूं तो उलझने बहुत है जिंदगी में,
पर सुकून सिर्फ़ मां के साथ बैठ कर आया है..
जब भी गलतियां की हर बार उन्होंने माफ किया है,
घर के बाहर होने पर हर बार मां के हाथों का खाना मिस किया है,
खुद धूप में तपती है बच्चों पर ना पड़ने इसका साया दिया हैं,
खुद एक रोटी कम खा कर बच्चों को पूरा निवाला दिया हैं..
प्यार क्या होता है यह सिर्फ मां ने बतलाया है ,
बच्चों की खुशी के लिए अपना हर दर्द छुपाया है .
जिन्होंने पकड़ी हमारी उंगली है और चलना मुझे सिखाया है,
लाख बार गिर जाऊं फिर से उठना उन्होंने सिखाया है ..
कितनी भी परेशान क्यों ना हो हमेशा मुस्कुराते देखा है,
जन्नत तो नहीं लेकिन करीब से अपनी मां को देखा है ..
इस संसार में सब मोह माया है ,
एक मां ही है जिसका साया हमेशा साथ पाया है ..
मां शब्दों में बयां नहीं हो सकती यह सिर्फ एक एहसास है ,
माँ मेरा तुम्हारे चरणों में बार-बार प्रणाम है...
शिखर गुप्ता
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