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UGC NET EXAM Qualify कैसे करे

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         UGC NET EXAM Qualify कैसे करे   मास्टर होने के बाद अध्यापक बनने के लिए UGC NET EXAM देने के बाद आप अध्यापक बन सकते है मगर इस परीक्षा की तैयारी कैसे करे UGC NET EXAM Qualify कैसे करे ऐसे बहुत से प्रश्न परीक्षार्थियों के मन में होते है तो आज ऐसे सवालों जवाब आपको मिल जाएंगे । साथ ही कम समय UGC NET EXAM Qualify कैसे करे यह भी आपको पता चल जाएगा ।          UGC NET EXAM Qualify करने से आप भारत देश के किसी भी कोने में कॉलेज में पढ़ाने वाले सहायक प्राध्यापक बन सकते हो इतना ही नहीं इस परीक्षा में अब तीन स्तर है। NET, JRF , PHD इन तीनों में से अपने सिर्फ NET, Qualify किया तो आप अध्यापक बन सकते हो और phd करने के लिए भी पात्र होते हो इसके साथ आप phd Qualify कर सकते हो मगर आपके अंक की cutoff NET cutoff से ज्यादा , ऊपर जाती है तो आपको JRF मिल जाएगा । इसमें आपको phd करने के लिए प्रत्येक महीने फैलोशिप मिलती जो कि 35,000  से भी ज्यादा रहेगी ।   UGC NET EXAM Qualify करने के लिए इसका पाठ्यक्रम कैसे पढ़े इस...

जीवन में असफलता भी जरूरी है

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   जीवन यह संघर्ष से भरा हुआ है । इसमें कभी सुख है तो कभी दुःख है यह जीवन के दो किनारे है इसमें ही बहते रहना ही जीवन की सही परिभाषा होगी । जीवन में कभी दुःख आए तो ज्यादा निरुत्साही , दुःखी नहीं होना चाहिए और सुख आने से या अच्छे दिन आने से ज्यादा उड़ना भी नहीं चाहिए । दोनों स्थितियों में स्थिरता और धैर्य ही इंसान के पास होना चाहिए तभी वह सही और जीवन जी सकता है। किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करते समय या , अन्य कोई जीवन सुधारने वाला , अच्छा कार्य करते हो तो उसमें निरंतरता , अखंडता , प्राणिकता और ईमानदारी ये यही गुण इंसानों में सफलता की कुंजी होती है । बहुत से छात्र पढ़ाई करते तो है मगर उनमें उपयुक्त गुणों की कमी होती है तो वह जल्दी ही खुद का मनोबल खो देते है इसलिए वह जल्द ही गलत रास्ता अपना लेते है। शारीरिक , भौतिक और मानसिक इन अवस्थाओं में इंसान का विकास होता है इसमें मासिक स्तर पर मजबूर होना बहुत ही जरूरी होता है ।      कभी असफलता मिले तो निराश नहीं होना चाहिए ।निराशा आती है तो भी खुद को संभालकर , थोड़ा रुककर और खुद की गलतियों का परीक्षण करके औ...

सौंदर्य तेरा

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 सौदर्य तेरा सुबह की सूरज की किरणें    तेरे गालो पर आके       गोरे रंग को सताती है           तो तू और भी सुंदर नजर आती है कोहरा झील-मिलसा चारों ओर है       उस की बूंदों में खड़ी तू           पैरों तले हरियाली हँस पड़ी है              उपर तू खड़ी है इसलिए वह भी डोलती है उपर से खग  जाते तेरे     तेरे चोटी का गुलाब देख         वह भी कुछ पल रुक जाते              तेरे सौदर्य को वह भी अपना ना चाहते तू शबनम में हाथ फैलाए      मुस्कान भरी उपर देख           मस्ती में खग बन ना चाहती तू                    हवा भी तेरे सौदर्य की सुंगध लेके                        मेरे कानों में आके सताती है                     ...

सपनों में आना छोड़ दे

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सपनों में आना छोड़ दे। चुराने वालों की, हम नींद भी चुरा ले। गर ओ सपनों में,आना छोड़ दे । राजदार उनको, बना ले हम अपना। गर ओ दिल, चुराना छोड़ दे।  बड़े मासूम बने बैठे हैं। जैसे के अनजान है दिल्लगी से। हम दिल का लगाना छोड़ देंगे, गर ओ नजरों से छूना छोड़ दे। यूं ही चलता रहे, रातभर सिलसिला बातों का।  सुकून से हम भी सो पाए, गर ओ रातों को जागना छोड़ दे। ©® अस्मिता प्रशांत "पुष्पांजलि" भंडारा, 9921096867

मंगलमय हो नववर्ष उनके लिए भी

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शीर्षक - मंगलमय हो नववर्ष उनके लिए भी  घुट - घुटकर जो जीते हैं , विष अश्रुओं का पीते हैं , नहीं खोलते हैं हृदय अपना , उधड़न पीड़ाओं की ख़ुद ही सीते हैं , मंगलमय हो नववर्ष उनके लिए भी । दंश कटु वचनों का जो सहते हैं , अलग होकर समाज से रहते हैं , ठण्डी रखते हैं आग मन की , किसी से व्यथा न अपनी कहते हैं , मंगलमय हो नववर्ष उनके लिए भी । ठोकरें दर - दर की जो खाते हैं , मूल्य निज आदर्शों की चुकाते हैं , श्रेष्ठ होकर भी हेय हैं जो सबकी दृष्टि में , अपयश , अपमान ही सबसे पाते हैं , मंगलमय हो नववर्ष उनके लिए भी । जो निर्बल हैं , दीन - हीन हैं , बंधु - बांधव , सहचर विहीन हैं , कर्तव्यों के हृदय पर भार हैं जो , कीच युग की , वेदना - मलिन हैं , मंगलमय हो नववर्ष उनके लिए भी । मुँह फेर चुके हैं जिनसे जगदीश , झुका रहता है हमेशा जिनका शीश , नहीं गले से जिनको लगाता है कोई , नहीं शीश पर हाथ रख देता है आशीष , मंगलमय हो नववर्ष उनके लिए भी ।                            -  मुकेश शर्मा          ...

राखी बनाम वचन पर्व

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राखी बनाम वचन पर्व थाल सजाकर बहन कह रही,आज बँधालो राखी। इस राखी में छुपी हुई  है, अरमानों की  साखी।। चंदन रोरी अक्षत मिसरी, आकुल कच्चे-धागे। अगर नहीं आए तो  समझो, हम हैं बहुत अभागे।। क्या सरहद से एक दिवस की,छुट्टी ना मिल पायी? अथवा कोई और वजह है, मुझे बता दो भाई ? अब आँखों को चैन नहीं है और न दिल को राहत। एक  बार बस आकर भइया, पूरी कर दो चाहत।। अहा! परम सौभाग्य कई जन, इसी ओर हैं आते। रक्षाबंधन के अवसर पर, भारत की जय गाते।। और साथ में ओढ़ तिरंगा, मुस्काता है भाई। एक साथ मेरे सम्मुख हैं, लाखों बढ़ी कलाई।। बरस रहा आँखों से पानी,कुछ भी समझ न आये। किसको बाँधू, किसको छोड़ू, कोई राह बताए? उसी वक्त बहनों की टोली, आई मेरे द्वारे। सोया भाई गर्वित होकर, सबकी ओर निहारे।। अब राखी की कमी नहीं है और न  कम हैं भाई। अब लौटेगी नहीं यहाँ से, कोई रिक्त कलाई।। लेकिन मेरे अरमानों को, कौन करेगा पूरा? राखी के इस महापर्व में, वचन रहे न अधूरा।। गुमसुम आँखों को पढ़ करके,बोल उठे सब भाई। पहले वचन सुनाओ बहनों, कुर्बानी ऋतु आई।। बहनों ने समवेत स्वरों से, कहा सुनो रे वीरा ! "धरती पर कोई भी नारी, न ...

बारिश पर रचनाएँ

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   स्वागत है आप सभी का इस अंक में बारिश सभी पसंद होती है | बारिश की खुशी शब्दों में बयां करने की खुशी तो लाजवाब होती है एक लेखक के लिए और कवि के लिए भी ... उसी खुशी को व्यक्त करने के लिए इस अंक को बारिश विषय दिया था और इसमें आपकी रचनाओं ने सच्च में  बारिश की खुशहाली को दोगुणा किया है | आप सभी बारिश की ढेर सारी शुभकामनाएं मारोती गंगासागरे नांदेड़ महाराष्ट्र से *****************************************  *बूंदों का मौसम* *हुई विदा अब ग्रीष्मा रानी रिमझिम आई ऋतु सुहानी हर्षित धरती का कोना कोना टिप-टिप बरस रहा है पानी *लुभा रहा ये महिना सावन खुशियों से भर जाते दामन उत्सवों से भरा माह यह सज जाते हैं हर घर आँगन *बरखा रानी की अगुवाई मोर पपीहों की शहनाई कारे बदरा थिरक रहे हैं करती चपलाएँ रोशनाई *हलधर खेतों को धाए हैं गोरी मुन्नू भी संग आए हैं झोली में बीज भर लाए हैं हाँ,मोती ज्यों बिखराए हैं *चारों ओर हरियाली छाई बाली भुट्टों ने ली अँगड़ाई ताल नदी भी झूम रहे हैं नौकाविहार की बारी आई *नहरें बनी गाँव की गलियाँ चुन्नू मुन्नू रानी व मुनिया छप-छप करते हैं तैराते कागज की रंगी...