कविता हौसला
तमन्नाओं कि रातो में
एक दिया जलता हैं
जाना है मुझे मंजिल तक
मेरा उत्साह मुझे कहता हैं
अंधियारे से चलकर
रोशनी को ढूंढना हैं
थके है पैर फिर भी
एक दौड़ लगानी हैं
टूटा है रिश्ता कुछ भी कठिन नही
उसे जोड़ना , यही दिल को समझना हैं
सोच बदलकर फिर उस रास्ते से जाना है
मुझे अंधियारे में खुशी का दीपक जलाना हैं
आज तक तो मैं रुका नही
क्यों कि ऑप्शन आज तक ढूंढा नही
प्राण वायु को कोई ऑप्शन नही
चलना हैं यही समझकर
मेरे जिंदगी में तेरे सिवा कोई और नही
प्रयास करना हैं मुझे इसी बात पर
भले ही आज क्यों ना मैं रुक जाऊं
तेरा इंकार ही मेरा हौसला बढ़ाता है
जब जब तू मुह फेरती हैं
मुझे खुद को तराश ने का
औसर मिलता हैं
कवि मारोती गंगासागरे
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