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नजर के तीर,,( गजल)

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, नजर के तीर,,( गजल)  इन कजरारी आंखों ने, मुझपे ऐसा वार किया बच ना सका मैं उस कातिल से, जिसपे मैने इतवार किया प्यार की ज्योति जलाई मैंने, खुन से सिंचा यह पौधा,  जब जब पङी जरुरत उसको, सतंभन सौ बार किया रुह में मैरी सिमट गयी वो, उन यादों की वो घङियां   लिया पैरों की बन बैठी, जीना मेरा दुश्वार किया  निंदियाँ ना आती, जिया ना लागे, ऐ कातिल तेरे वो वादे,  मदन अकेला कहाँ गयी वो, जिससे तुने प्यार किया     मदन सुमित्रा सिंघल पत्रकार साहित्यकार शिलचर असम  मो.9435073653 ###############################      (2)  , बिजली कहाँ गिरोगी,,( गजल)  ऐ बिजली तुम कहाँ पे गिरोगी, बतादो हमें हम यहाँ रहते हैं घनघोर अँधेरा घटाटोप छायी, श्याम वर्ण सी अंधियारी रातें देती हिलोरें शर्द ऋतु सी, बताओ हमें हम क्यों सहते हैं खो जाती हो तुम किस दुनिया में, नजर ढुंढती है कहाँ खोई तुम होती तसल्ली दिदार तेरे, जब जी भर भर देख लेते हैं तङफाओ ना आओ आगोश में, अरमां हमारे पुरे करो तुम,  मदन सिंघल ऐ चमक चांदनी अब, आने को हम खुद कहते हैं। मदन सुमित्रा...

उम्मीदों के दीपक

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ग़ज़ल - उम्मीदों के दीप.... उम्मीदों के दीप जलाये बैठे हैं । गहन तिमिर में प्रीत निभाये बैठे हैं ।। गैरों से क्या आस करें अपनेपन की । अपनों से ही यहाँ सताये बैठे हैं ।। जिसको अपना समझा उससे घात मिली । फिर भी उसको गले लगाये बैठे हैं ।। जो होगा , हो जाएगा , हो जाने दो । खुद को हम बस ये समझाये बैठे हैं ।। दुनिया में रिश्ते "निश्छल" कब होते हैं । गठरी में सब स्वार्थ दबाये बैठे हैं ।। रचनाकार - नवीन गौतम नयागाँव - कोटा - राजस्थान मो.नं. - 9057558170 ★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★ ऐसे ही सभी विधायों का निःशुल्क प्रकाशन करने के लिए हमे मेल करmarotigangasagare2017@gmail.com

मेरी रचना गजल

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  ग़ज़ल शीर्षक:मेरी रचना बहुत लम्बी शब है सहर चाहिये सफ़र में मुझे हमसफ़र चाहिए भले दोस्ती हो सदा सोच कर मगर दुश्मनी को जिगर चाहिए ख़ुदा भी ज़मी पर उतर जाएगा इबादत में लेकिन असर चाहिए जिसे तुमने तोड़ा हज़ारो दफ़ा वही दिल हमें जोड़कर चाहिए मोहब्बत से दुनिया न महरूम हो सभी से दुआ उम्र भर चाहिए बलजीत सिंह बेनाम 103/19 पुरानी कचहरी कॉलोनी हाँसी 125033 मोबाइल 9996266210 ********************************************