प्रतिशोध


 
प्रतिशोध की ज्वाला में तुम्हारा बहकना अच्छा नहीं !
प्रतिशोध की आंधी में कहीं जल न जाए घर द्वार ख़ुद का !!
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प्रतिशोध का अंजाम कभी अच्छा नहीं देखा हमने ! 
मेरी मानो तो माफ़ कर दो उसकी नीचता को !! 
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प्रतिशोध की मंशा से अपराध का ग्राफ बढ़ गया इन दिनों ! 
प्रतिशोध की ज्वाला उठे इससे पहले बुझा दो इसको !! 
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प्रतिशोध की अग्नि में कितने खानदान भस्म हो गए ! 
क्या अभी भी प्रतिशोध का अंजाम देखना बाकी है !! 
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प्रतिशोध की हिंसा को रोक सको तो रोक लो ! 
वरना यह प्रतिशोध तुम्हारा परिवार ले डूबेगा !! 
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प्रतिशोध की भयावह तस्वीरों को देखा है हमने ! 
भला मैं कैसे कहूं तुमसे कि प्रतिशोध अच्छा है !! 
************* तारकेश्वर मिश्र जिज्ञासु कवि व मंच संचालक अंबेडकरनगर उत्तर प्रदेश !

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