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नदी किनारे कुछ पल कहानी संग्रह

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     आप भी हिंदी कहानियां पढ़ने के शौकीन है तो आपके लिए अच्छी किताब हाली में प्रकाशित हुई किताब कहानी संग्रह की " नदी किनारे कुछ पल " लेखक मारोती गंगासागरे का प्रथम कहानी संग्रह और इस किताब जीवन की छोटी -, छोटी घटनाओं को काफी रोचक , सरल और आसान हिंदी में लिखा है ।      " नदी किनारे कुछ पल " कहानी। संग्रह नांदेड़ के ही नव साहित्यकार प्रकाशन संस्था से प्रकाशित हुआ है और इस किताब की भूमिका हिंदी के प्रसिद्ध साहित्यिक तथा महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त लेखक डॉ सुनील जाधव सर जी ने लिखी है ।   बहुत से पाठकों का कहना है कि यह किताब पढ़ते समय आलस और उदासी नहीं आती है साथ इस किताब की भाषा शैली में पाठकों को बांधे रखने की क्षमता है । प्रत्येक कहानी एक नए विषय को वर्णित करती है और इसमें प्रेम , प्रकृति सौदर्य , नैतिकता , युवा वर्ग का भटकाव और मंजिल से दूर जाना और समय के साथ ही फिर से पढ़ाई करना , किसान जीवन , मजदूर वर्ग और समाज में उनके साथ होने वाला बर्ताव , पेपर लीक जैसे ज्वलंत विषयों पर भी कहानी लिखी हुई है । इतना ही नह...

कृषि संस्कृति का त्यौहार बैल पोला

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                   प्रा मारोती गंगासागरे         नांदेड़ महाराष्ट्र से      वर्तमान समय में भारतीय संस्कृति के बहुत से महत्वपूर्ण त्यौहार कम होते जा रहे है । खास कर खेती से संबंधित तथा कृषि जीवन से संबंधित त्यौहार लगभग लुप्त हो गए हैं और जो भी मनाए जा रहे है वह भी आधुनिक तरीके से किसान का सबसे नजदीकी साथ उसका बैल होता है । बैल किसान को खेती के हाल जोतना , बुआई करना तथा बुआई के लिए खेती तैयार करने के कामों में बैलो को महत्वपूर्ण भूमिका होती है । इन्हीं बैलों के लिए किसान का महत्त्व पूर्ण त्यौहार जो कि सावन महीने का अंतिम दिन होता है । उसे पोला कहा जाता है । इस त्यौहार को विभिन्न राज्यों विभिन्न नामों से जाना जाता है ।         किसान का सच्चा साथी बैल होता है और इन बैलों के महत्व को मानने के लिए तथा खेती में किसान के साथ मेहनत करने वाले बैलों को पूजने के लिए तथा वह भी पूजने योग्य है और इन्हें केवल एक प्राणी नहीं बल्कि किसान के जीवन का अविभाज्य अंग है । और इन्हें भी...

रक्षाबंधन विश्वास और प्यार का प्रतीक है ।

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                भारतीय हिंदू संस्कृति में विभिन्न त्यौहार धूम-धाम से मनाए जाते हैं और इन सभी त्योहारों का एक अलग महत्त्व भी है । उसी में सावन जैसे पवित्र महीने में आने वाले त्यौहारों में राखी रक्षाबंधन यह एक भारतीय संस्कृति में बड़े ही जोश , जुनून के साथ मनाने वाला त्यौहार है । रक्षाबंधन त्यौहार यह प्राचीन काल से मनाया जाता है । महाभारत काल से इस त्यौहार का प्रचलन माना जाता है ।          सभी रिश्तों में भाई - बहन का रिश्ता यह एक अनोखा और बहुत ही प्यारा रिश्ता माना जाता है । सबसे पवित्र रिश्तें की  बात जब भी सामने आती है तो भाई - बहन का रिश्ता हो आँखो के सामने आता है । इसी रिश्तें की खूबसूरती बनाए रखने के लिए रक्षाबंधन यह त्यौहार मनाया जाता है । आधुनिक समय में सभी रिश्तों में परिवर्तन आया है तो यह रिश्ता कैसे छूट सकता है । इसमें परिवर्तन आया तो है । मगर समय के साथ यह त्यौहार मनाने की परंपरा में परिवर्तन आया है मगर इस रिश्ते की गहराई और भी मजबूत हुई है यह खेल ही उच्चित होगा क्यों कि भाग - दौड़ के समय मे...

हिंदी क्यों पढ़नी चाहिए ?

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  हिंदी क्यों पढ़नी चाहिए ?   मारोती गंगासागरे  यह सवाल आपके मन में कभी आया है आया होगा और आप अध्यापक है तो फिर संप्रतिशत आया होगा ।अभी एडमिशन प्रारंभ है तो पेरेंट्स और छात्र भी पूछते है कि हम हिंदी क्यों पढ़े , हिंदी से पढ़ने से हमें क्या मिलेगा ? ऐसे बहुत से सवाल करते है । क्यों कि वर्तमान समय की बढ़ती बेरोजगारी को देखते हुए पैरेंट्स और छात्र शिक्षा पूरी होने के तुरंद बाद रोजगार प्राप्त करना चाहता है । इनका मानना है कि हिंदी भाषा पढ़ने से रोजगार मिलता नहीं इसी बात नहीं है हिंदी पढ़ने से भी बहुत से रोजगार मिलते है ।      हिंदी क्यों पढ़नी चाहिए ? इस प्रश्न का उत्तर तो देता ही हूँ । वर्तमान में हिंदी केवल संवादों की और केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने की भाषा नहीं रही है । वह आधुनिक युग में रोजगार देने में सक्षम और समृद्ध भाषा बन चुकी है । हमें बस उसी प्रकार हिंदी पढ़नी चाहिए । हिंदी हमारी राष्ट्र भाषा है और विश्व में सबसे अधिक बोली और समझी जाने वाली भाषाओं में से एक है । निम्न में कुछ बिंदुओं द्वारा देखते है कि हिंदी क्यों पढ...

योग का वर्तमान समय में महत्व और उपयोगिता

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      जागतिक योग दिवस यह 21 जून को मनाया जाता है।  योग का वतमान समय में महत्व और उपयोगिता योग यह केवल एक प्रक्रिया नहीं या एक दिन करने या मनाने की विधि नहीं है। योग को हमें अपने दिनचर्या का हिस्सा बनाने चाहिए । योग से शारीरिक , मानसिक , लाभ होता है इस बात को स्वीकार करना होगा ।       आज वर्तमान समय में इंसान तकनीकी जीवन जी रहा है। तकनीकी आवश्यक है ही साथ ही हानिकारक भी है। इसके इस्तेमाल से मानसिक स्वास्थ्य पहले प्रभावित होता है और फिर धीरे - धीरे शरीर प्रभावित होने लगता है। समय रहते हम सचेत होकर नियमित योग करते है तो हमारा स्वास्थ भी ठीक रह सकता है।     अन्न, कपड़ा , मकान , आरोग्य और शिक्षा यह प्राथमिक आवश्यकताएं है। इन में आरोग्य यह सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता हैं क्यों कि हमारा आरोग्य अच्छा है तो बाकी सब चीजों का हम लाभ ले सकते है। अन्यथा नहीं । योग करने के मानवी जीवन में बहुत से फायदे है यह फायदे निम्नलिखित देखे जा सकते है । योग दिवस क्यों मनाया जाता है :-               वर्तमान समय में ...

UGC NET EXAM Qualify कैसे करे

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         UGC NET EXAM Qualify कैसे करे   मास्टर होने के बाद अध्यापक बनने के लिए UGC NET EXAM देने के बाद आप अध्यापक बन सकते है मगर इस परीक्षा की तैयारी कैसे करे UGC NET EXAM Qualify कैसे करे ऐसे बहुत से प्रश्न परीक्षार्थियों के मन में होते है तो आज ऐसे सवालों जवाब आपको मिल जाएंगे । साथ ही कम समय UGC NET EXAM Qualify कैसे करे यह भी आपको पता चल जाएगा ।          UGC NET EXAM Qualify करने से आप भारत देश के किसी भी कोने में कॉलेज में पढ़ाने वाले सहायक प्राध्यापक बन सकते हो इतना ही नहीं इस परीक्षा में अब तीन स्तर है। NET, JRF , PHD इन तीनों में से अपने सिर्फ NET, Qualify किया तो आप अध्यापक बन सकते हो और phd करने के लिए भी पात्र होते हो इसके साथ आप phd Qualify कर सकते हो मगर आपके अंक की cutoff NET cutoff से ज्यादा , ऊपर जाती है तो आपको JRF मिल जाएगा । इसमें आपको phd करने के लिए प्रत्येक महीने फैलोशिप मिलती जो कि 35,000  से भी ज्यादा रहेगी ।   UGC NET EXAM Qualify करने के लिए इसका पाठ्यक्रम कैसे पढ़े इस...

जीवन में असफलता भी जरूरी है

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   जीवन यह संघर्ष से भरा हुआ है । इसमें कभी सुख है तो कभी दुःख है यह जीवन के दो किनारे है इसमें ही बहते रहना ही जीवन की सही परिभाषा होगी । जीवन में कभी दुःख आए तो ज्यादा निरुत्साही , दुःखी नहीं होना चाहिए और सुख आने से या अच्छे दिन आने से ज्यादा उड़ना भी नहीं चाहिए । दोनों स्थितियों में स्थिरता और धैर्य ही इंसान के पास होना चाहिए तभी वह सही और जीवन जी सकता है। किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करते समय या , अन्य कोई जीवन सुधारने वाला , अच्छा कार्य करते हो तो उसमें निरंतरता , अखंडता , प्राणिकता और ईमानदारी ये यही गुण इंसानों में सफलता की कुंजी होती है । बहुत से छात्र पढ़ाई करते तो है मगर उनमें उपयुक्त गुणों की कमी होती है तो वह जल्दी ही खुद का मनोबल खो देते है इसलिए वह जल्द ही गलत रास्ता अपना लेते है। शारीरिक , भौतिक और मानसिक इन अवस्थाओं में इंसान का विकास होता है इसमें मासिक स्तर पर मजबूर होना बहुत ही जरूरी होता है ।      कभी असफलता मिले तो निराश नहीं होना चाहिए ।निराशा आती है तो भी खुद को संभालकर , थोड़ा रुककर और खुद की गलतियों का परीक्षण करके औ...

सौंदर्य तेरा

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 सौदर्य तेरा सुबह की सूरज की किरणें    तेरे गालो पर आके       गोरे रंग को सताती है           तो तू और भी सुंदर नजर आती है कोहरा झील-मिलसा चारों ओर है       उस की बूंदों में खड़ी तू           पैरों तले हरियाली हँस पड़ी है              उपर तू खड़ी है इसलिए वह भी डोलती है उपर से खग  जाते तेरे     तेरे चोटी का गुलाब देख         वह भी कुछ पल रुक जाते              तेरे सौदर्य को वह भी अपना ना चाहते तू शबनम में हाथ फैलाए      मुस्कान भरी उपर देख           मस्ती में खग बन ना चाहती तू                    हवा भी तेरे सौदर्य की सुंगध लेके                        मेरे कानों में आके सताती है                     ...

सपनों में आना छोड़ दे

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सपनों में आना छोड़ दे। चुराने वालों की, हम नींद भी चुरा ले। गर ओ सपनों में,आना छोड़ दे । राजदार उनको, बना ले हम अपना। गर ओ दिल, चुराना छोड़ दे।  बड़े मासूम बने बैठे हैं। जैसे के अनजान है दिल्लगी से। हम दिल का लगाना छोड़ देंगे, गर ओ नजरों से छूना छोड़ दे। यूं ही चलता रहे, रातभर सिलसिला बातों का।  सुकून से हम भी सो पाए, गर ओ रातों को जागना छोड़ दे। ©® अस्मिता प्रशांत "पुष्पांजलि" भंडारा, 9921096867

मंगलमय हो नववर्ष उनके लिए भी

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शीर्षक - मंगलमय हो नववर्ष उनके लिए भी  घुट - घुटकर जो जीते हैं , विष अश्रुओं का पीते हैं , नहीं खोलते हैं हृदय अपना , उधड़न पीड़ाओं की ख़ुद ही सीते हैं , मंगलमय हो नववर्ष उनके लिए भी । दंश कटु वचनों का जो सहते हैं , अलग होकर समाज से रहते हैं , ठण्डी रखते हैं आग मन की , किसी से व्यथा न अपनी कहते हैं , मंगलमय हो नववर्ष उनके लिए भी । ठोकरें दर - दर की जो खाते हैं , मूल्य निज आदर्शों की चुकाते हैं , श्रेष्ठ होकर भी हेय हैं जो सबकी दृष्टि में , अपयश , अपमान ही सबसे पाते हैं , मंगलमय हो नववर्ष उनके लिए भी । जो निर्बल हैं , दीन - हीन हैं , बंधु - बांधव , सहचर विहीन हैं , कर्तव्यों के हृदय पर भार हैं जो , कीच युग की , वेदना - मलिन हैं , मंगलमय हो नववर्ष उनके लिए भी । मुँह फेर चुके हैं जिनसे जगदीश , झुका रहता है हमेशा जिनका शीश , नहीं गले से जिनको लगाता है कोई , नहीं शीश पर हाथ रख देता है आशीष , मंगलमय हो नववर्ष उनके लिए भी ।                            -  मुकेश शर्मा          ...

राखी बनाम वचन पर्व

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राखी बनाम वचन पर्व थाल सजाकर बहन कह रही,आज बँधालो राखी। इस राखी में छुपी हुई  है, अरमानों की  साखी।। चंदन रोरी अक्षत मिसरी, आकुल कच्चे-धागे। अगर नहीं आए तो  समझो, हम हैं बहुत अभागे।। क्या सरहद से एक दिवस की,छुट्टी ना मिल पायी? अथवा कोई और वजह है, मुझे बता दो भाई ? अब आँखों को चैन नहीं है और न दिल को राहत। एक  बार बस आकर भइया, पूरी कर दो चाहत।। अहा! परम सौभाग्य कई जन, इसी ओर हैं आते। रक्षाबंधन के अवसर पर, भारत की जय गाते।। और साथ में ओढ़ तिरंगा, मुस्काता है भाई। एक साथ मेरे सम्मुख हैं, लाखों बढ़ी कलाई।। बरस रहा आँखों से पानी,कुछ भी समझ न आये। किसको बाँधू, किसको छोड़ू, कोई राह बताए? उसी वक्त बहनों की टोली, आई मेरे द्वारे। सोया भाई गर्वित होकर, सबकी ओर निहारे।। अब राखी की कमी नहीं है और न  कम हैं भाई। अब लौटेगी नहीं यहाँ से, कोई रिक्त कलाई।। लेकिन मेरे अरमानों को, कौन करेगा पूरा? राखी के इस महापर्व में, वचन रहे न अधूरा।। गुमसुम आँखों को पढ़ करके,बोल उठे सब भाई। पहले वचन सुनाओ बहनों, कुर्बानी ऋतु आई।। बहनों ने समवेत स्वरों से, कहा सुनो रे वीरा ! "धरती पर कोई भी नारी, न ...

बारिश पर रचनाएँ

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   स्वागत है आप सभी का इस अंक में बारिश सभी पसंद होती है | बारिश की खुशी शब्दों में बयां करने की खुशी तो लाजवाब होती है एक लेखक के लिए और कवि के लिए भी ... उसी खुशी को व्यक्त करने के लिए इस अंक को बारिश विषय दिया था और इसमें आपकी रचनाओं ने सच्च में  बारिश की खुशहाली को दोगुणा किया है | आप सभी बारिश की ढेर सारी शुभकामनाएं मारोती गंगासागरे नांदेड़ महाराष्ट्र से *****************************************  *बूंदों का मौसम* *हुई विदा अब ग्रीष्मा रानी रिमझिम आई ऋतु सुहानी हर्षित धरती का कोना कोना टिप-टिप बरस रहा है पानी *लुभा रहा ये महिना सावन खुशियों से भर जाते दामन उत्सवों से भरा माह यह सज जाते हैं हर घर आँगन *बरखा रानी की अगुवाई मोर पपीहों की शहनाई कारे बदरा थिरक रहे हैं करती चपलाएँ रोशनाई *हलधर खेतों को धाए हैं गोरी मुन्नू भी संग आए हैं झोली में बीज भर लाए हैं हाँ,मोती ज्यों बिखराए हैं *चारों ओर हरियाली छाई बाली भुट्टों ने ली अँगड़ाई ताल नदी भी झूम रहे हैं नौकाविहार की बारी आई *नहरें बनी गाँव की गलियाँ चुन्नू मुन्नू रानी व मुनिया छप-छप करते हैं तैराते कागज की रंगी...

होली पर रचनाएँ

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   होलो की आप सभी को ढेर सारी शुभकामनाएं | स्वागत करता हूँ आप सभी का मेरी रचना के इस मंच पर |     भारतीय संस्कृति में बहुत से त्योहार मनाएँ जाते उन में महत्वपूर्ण और एकता को बांधे रखने वाला त्योहार होली का हैं | साथ ही होली का जब दहन होता है तो उसमें सभी नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट कर सकारात्मक सोच , पहल का अंगीकार करना ऐसी कही धारनाएँ होली का त्योहार मनाने के पीछे हैं |         हम भी अपने साहित्यिक जगत में होली इस विषय पर कई रचनाकारों के रचनाओं का संचयन किया और इस तरह होली मनाने का प्रयास किया...             रंगों में रंग प्रेम रंग      प्रेम रंग सा दूजा रंग ना कोई      इस रंगमे रंगना चाहे सभी      फिर भी इससे द्वेष रखते सभी आओ यह द्वेष मिटाए  होली में लाल गुलाल उड़ाएँ सभी रंग छोड़कर एकता में हम रंग दिखाएँ... इसी तरह होली का त्योहार मनाएँ संपादक मारोती गंगासागरे नांदेड़ महाराष्ट्र से विषय: होली   होली मिलन-मधुर मिलन होलिका दहन में, सवाल उठता ज़हन में, क्...

बारिश हो रही हैं

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बारिश हो रही हैं बारिश हो रही हैं, तेरी याद आ रही हैं | धरा के आँचल में..., बर्खा गुनगुना रही हैं | य सारे जहाँ में खुशी हैं , दिलबर थोड़ीसी दूरी हैं | इस मौसम के बहारों में..., आओ ना साथ चलते हैं | दिल का दरवाजा खोलके , सुनो बारिश भी गा रही हैं | प्रेम रंग में डूबकर अब , ओ भी मस्ती में आ रही हैं | मिट्टी का गंध उढ़ा हैं , हवा में फैला चारो ओर | मिलन हुआँ हैं प्रकृति का , देख बारिश में भीगा हैं तन | मारोती गंगासागरे 

गोष्ठी व पुस्तक विमोचन सम्पन्न

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गोष्ठी व पुस्तक विमोचन सम्पन्न गुवाहाटी। मेलाराम वफ़ा साहित्य अकादमी के तत्वाधान में गुवाहाटी असम साहित्य सभा, ज्योति अग्रवाल हाल में मेलाराम वफ़ा साहित्य अकादमी की दूसरी मासिक गोष्ठी समारोह पूर्वक सम्पन्न हुई। कार्यक्रम का प्रारम्भ सरस्वती वंदना तथा अतिथि गण द्वारा दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। प्रसिद्ध शायर, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और पत्रकार स्व. पंडित मेलाराम वफ़ा को श्रद्धापूर्वक याद किया गया। मेलाराम वफ़ा साहित्य अकादमी के सौजन्य से डॉ चंद्रकांता शर्मा जी की पुस्तक "युगे- युगे शक्ति अपरूपा" का विमोचन भी हुआ। गोष्ठी के मुख्य अतिथि आ. दयानंद पाठक जी, अति विशिष्ट अतिथि आ. मुक्ता बिस्वास, एवं विशिष्ट अतिथि आ.मंजरी शर्मा रहीं। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता आ. नंदा शर्मा जी, आ. सौमित्रम जी और  ब्रह्मपुत्र साहित्य मंच के अध्यक्ष किशोर रहे। श्री जैन ने पुस्तक से जुड़ी नारी शक्ति के कई उदहारण दिए और बताया कि वर्त्तमान युग में महिलाओं ने अपनी शक्ति और मज़बूती का परिचय भी समय समय पर दिया है। वक्ताओं ने अपने वक्तव्य में नारी की सहनशीलता, समरसता और धैर्य को पुरुष से बढ़कर बताया। पुस्...

पत्तल चाटू

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पत्तल चाटू सालों तक जो लोग कांग्रेस के खिलाफ बोलने को देश के खिलाफ बोलना साबित करते थे अब वही लोग भाजपा के खिलाफ बोलने को देशहित में बोलना मानते हैं। असल में ऐसे लोगों का देश से कुछ लेना-देना नहीं है। ऐसे लोग सत्ता का पक्ष और सत्ता का विरोध देशहित में नहीं चुनते बल्कि स्वहित में चुनते हैं। इनको जहाँ मुफ्त में पत्तल चाटने को मिलता है, उसकी जयकारी लगाते हैं, जहाँ नहीं मिलता उसके विरोध में हो जाते हैं। देश के जन सामान्य को इतनी कुशलता से भरमाते हैं कि आम जन इनको देश का प्रखर शुभचिंतक मान लेता है। इनका न कोई सिद्धांत होता है न ईमान। इनके लिए देश मात्र स्वार्थ सिद्धि का अड्डा लगता है और जनता को ये अपने हित में भीड़ समझते हैं। इनको आज के समय में मीडिया गोदी लगता है और पहले धवल लगता था। ऐसे लोग इस बात पर चर्चा कभी नहीं करते कि भारत में कई बड़े नेताओं के अपने मीडिया हाउस, अपने पत्रकार और अपने लेखक रहे हैं जो गधे को घोड़ा और घोड़े को गधा सिद्ध करना ही अपना परम उद्देश्य मानते हैं। ये आस्तीन के साँप से भी अधिक खतरनाक होते हैं क्योंकि ये भोली जनशक्ति को अपने साथ जोड़े रखने में अति कुशल होते हैं। ऐसे फ्...

गोदान की धनिया और धनिया का गोदान

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गोदान की धनिया और धनिया का गोदान                   डॉ. अवधेश कुमार 'अवध' गोदान के संदर्भ में दो मुख्यत: बातें सामने आती हैं। एक 1936 में प्रकाशित मुंशी प्रेमचंद का जग जाहिर उपन्यास गोदान और दूसरा मत्यु के उपरान्त वैतरणी पार करने के लिए गोदान। इन दोनों गोदानों में गाय का जिक्र है साथ ही आज के दौर में परिवर्तन की शुरुआत हो गई है। अब गाय के बदले कुछ हजार रुपये देकर काम चलाया जाने लगा है जिसका श्रीगणेश प्रेमचंद की धनिया ने किया था।  हिंदू धर्म में सर्वोच्च चाहत के रूप में मोक्ष प्राप्ति को माना गया है। मनुष्य जन्म से लेकर मृत्यु तक इसी मोक्ष की चाहत में पल- प्रतिपल धर्म सम्मत कार्य करता रहता है। सामाजिक नियन्त्रण का प्रमुख साधन धर्म उसे पाप न करने और यथाशक्ति पुण्य करने की ओर प्रवृत्त रखता है। धार्मिक क्रिया कलाप, पूजा, व्रत, अनुष्ठान आदि बहुत से ऐसे कार्य हैं जिनके पीछे एक मात्र उद्देश्य मोक्ष ही होता है। मोक्ष पाना अर्थात् पुनर्जन्म एवं आवागमन से मुक्त हो जाना। मोक्ष प्राप्ति के लिए कुछ मानकों को पूरा करना होता है जैसे पुत्र पैदा करना, कन्...

मैं विश्वनाथ का नंदी हूँ

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मैं विश्वनाथ का नंदी हूँ मैं विश्वनाथ का नंदी हूँ, दे दो मेरा अधिकार मुझे। वापी में हैं मेरे बाबा, कर दो सम्मुख-साकार मुझे।। अब तो जागो हे सनातनी, डम- डमडम डमरू बोल रहा। न्यायालय आकर वापी में, इतिहास पुराने खोल रहा।। अब बहुत छुप चुके हे बाबा, करने दो जय-जयकार मुझे। एक विदेशी खानदान ने, मंदिर को नापाक किया था। मूल निवासी सनातनी के, काट कलेजा चाक किया था।। औरंगजेब नाम था उसका, वह धर्मांध विनाशक था। भारत माता के आँचल का, वह कपूत था,नाशक था।। आस्तीन में साँप पले थे, बहु बार मिली थी हार मुझे। ले रहा समय अब अँगड़ाई, खुल रहे नयन सुविचार करो। बहुत सो चुके हे मनु वंशज, उठ पुनः नया उपचार करो।। लख रहा दूर से बेसुध मैं, वर्षों से बाबा दिखे नहीं। मैं अपलक चक्षु निहार रहा, विधि भी आकर कुछ लिखे नहीं।। अवध अहिल्या भक्तिन जैसा, दिख नहीं रहा अवतार मुझे। डॉ अवधेश कुमार अवध साहित्यकार व अभियंता संपर्क 8787573644

धार्मिक ग्रंथों की पुनः मीमांसा आवश्यक

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धार्मिक ग्रंथों की पुनः मीमांसा आवश्यक डॉ अवधेश कुमार अवध समय के साथ प्राचीन काल के कई शब्दों के अर्थ बदल चुके हैं। कुछ शब्दों के अर्थ अपने पर्याय से इतर रूढ़ हो गए हैं। उनका रूढ़त्व विपरीत अर्थ या अनर्थ तक पहुँच गया है। संस्कृत या हिंदी काव्यों का काव्य सौष्ठव भी आज जन साधारण के लिए कठिनाई का कारण है। इसी संदर्भ में आचार्य केशव दास को "कठिन काव्य का प्रेत" का संबोधन मिला था। अलंकारों के झंकारों में काव्य में रस एवं रुचि की निष्पत्ति सुगम होती है जो समझ में न आने पर नुकसानदायक भी है। इसी तरह शब्द शक्ति त्रय यथा- अभिधा, लक्षणा और व्यंजना को आज के समय में या तो हम समझना भूल गए हैं या समझना नहीं चाहते और स्वार्थवश दुरुपयोग भी करते हैं।  एक और कमी प्रायः देखी जा सकती है। किसी विषय को ठीक से जाने या समझे बिना अपनी विशेषज्ञ राय प्रस्तुत करना। "नीम हकीम खतरे जान" केवल झोला छाप डाक्टरों तक ही सीमित नहीं है बल्कि प्रायः सभी क्षेत्रों में इसके अंगद पाँव जमे हैं। विशेषज्ञता की योग्यता के बिना ही बिना किसी लाज-शर्म के तत्संबंधी विषय में राय लेने और देने का खेल, सामान्य जन मानस के...

कबीर और तुलसी को बाँटने वाले नासमझ हैं**कबीर के उद्देश्य को तुलसी ने पूर्ण किया**कबीर और तुलसी दोनों हिंदुत्व के पोषक थे*

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*कबीर और तुलसी को बाँटने वाले नासमझ हैं* *कबीर के उद्देश्य को तुलसी ने पूर्ण किया* *कबीर और तुलसी दोनों हिंदुत्व के पोषक थे* डॉ अवधेश कुमार अवध संत कबीर के जन्म के बारे में प्रचलित कहानियों का निचोड़ यह है कि ये लहरतारा सरोवर के किनारे पाए गए। एक जुलाहे दम्पत्ति ने इनका लालन- पालन किया और ये भी जुलाहे का काम करने लगे। उस समय काशी जनपद में जुलाहे हिंदू नहीं थे पर अन्य मुसलमानों की तरह कट्टर मुसलमान भी नहीं थे। अर्थात् रोजी-रोटी के जुगाड़ में ये सूत कातने वाले सामान्य सर्वहारा थे। शायद इसीलिए कबीर कभी भी इस्लाम या मुसलमानों से प्रभावित नहीं दिखे। जबकि साधारण मुसलमान अवश्य कबीर से प्रभावित थे। कुछ बड़े होने पर कबीर उस समय के वैष्णव गुरु रामानन्द को गुरु बनाने पर अटल रहे। यदि कबीर का परिवार कट्टर मजहबी होता तो पालित बेटे द्वारा यह सोचना भी सम्भव नहीं था। कबीर ने ब्राह्मणों के घोर विरोध और गुरु रामानन्द द्वारा बार-बार ठुकराए जाने के बाद भी उनको ही गुरु माना। अन्ततः रामानन्द ने कबीर को अपने शिष्यों में प्रथम स्थान दिया।  कबीर जीवन पर्यंत "राम" को जपते रहे और "राम" से परिचय क...