होली आयी रे

होली आयी रे (कविता)




होली  आयी रे ,  होली  आयी रे,
मुझे गुलाल लगाने भाभी आयी रे‌।


सब  को  होली में  बहुत बधाई रे,
होली  में है  सब  की  परछाई  रे।


धूम - धाम  से मैं  होली मनाऊं रे,
अबीर  लगाने  प्रिय को बुलाऊं रे।


आज खूब शुभ-शुभ दिन है हरपल रे,
हर घर- आंगन,सड़क पे है हरचल  रे‌।


पुआ खाकर अब होली मनाओ रे,
पिचकारी  लेकर  यहां  आओ रे।


रोचक  प्यारी  है  होली  के  दिन रे,
मन नहीं लगता आज प्रिय के बिन रे।


होली  के  दिन  मेहमान  आया रे,
और  थैला  में  पकवान  लाया रे।


सब से प्यार करें इस होली में रे,
 रंग - अबीर सब रखों झोली में रे।
   अनुरंजन कुमार "अंचल"
     साहित्यिक नाम
     कुमार "अंचल"
       कवि/शायर
       अररिया, बिहार
      7488139688

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