सुनसान राहें ,सूना शहर है



*"सुनसान राहें ,सूना शहर है "

 सुनसान राहे,सूना शहर है |
 चुप्पीसी क्यों है? मरघट सा घर हे 
 अरमान तड़के या टूटे हैं सपने?
 यह क्या हो रहा है? सहमा  हर बशर है |
 कोई तो बताए क्यों सदमे में सब हैं?
 टूटा है तारा या सदमे में रब है?
 तोड़ो यह चुप्पी, गाओ ना नगमे,
 छोड़ो उदासी, जीवन एक क्षण है |
 नाचो ना गांओ,  मर्जी तुम्हारी,
 सदा मुस्कुराओ, है यह मर्जी हमारी|
 रो रो के गुजरे, यह कैसा सफर है?
 हंस बोलकर, अब  तोड़ो खुमारी |
 सन्नाटा पसरा, है अपनी ही गलती |
  ना करते जो मन की, कुदरत ना छलती ,
 फैलाकर दामन, दुआ रब से मांगे,
 वह सुनता है सबकी,बला उससे टलती |
 उजली किरण फिर आएगी हम पर,
 सागर दया का वह हे करुणाकर |
 मानस-पटल पर, बैठा है सबके,
 मिलकर पुकारे" करो रक्षा हरिहर"
 श्री कृष्ण खोडे " किशोर"*******🙏*                    

11/B=विनायक नगर,उज्जैन रोड देवास( मध्य प्रदेश)                           MO=8982656102

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