राष्ट्रीय कवि रामधारी सिंह दिनकर जी को कोटि-कोटि प्रणाम

राष्ट्रीय कवि रामधारी सिंह दिनकर जी को कोटि-कोटि प्रणाम

*अवतरित हुए तुम इस वसुधा पर
दिनकर सा ही तेज लिए।
हे "रश्मि रथी" चिर नमन तुम्हें।
लिखे "रेणुका", "हुंकार" लिखे
"इतिहास के आंसू"कभी लिखे
और"बापू" को भी याद किए।
हे रश्मिरथी चिर नमन तुम्हें।
हो "कुरूक्षेत्र"के तुम नायक
तव लेखन है असिधार लिए।
रचना करके "उर्वशी"ग्रंथ
आत्मिक सौंदर्य गढ़ा तुमने।
"परशुराम की प्रतीक्षा"लिख
"संस्कृति के चार अध्याय" पढ़ा तुमने।
आतंकी महलों के सम्मुख
लिख लिख जनवाद खड़ा करते।
आजादी का बिगुल बजा कर
जन-मन ‌में राष्ट्र प्रेम भरते।
अपनी वांणी को मुखरित कर
जन जन को जागृत करते।
हे दिव्यरूप!हे रश्मिरथी
हे भरत! तुम सजग राष्ट्र 
के चिर प्रहरी।तुमसे सदा
प्रदीपित होगा यह हिन्दी
साहित्य गगन, कोटि-कोटि
शत् कोटि नमन *🙏🙏

डॉ मधु पाठक, जौनपुर, उत्तर प्रदेश।

टिप्पणियाँ

कविता में दिनकर जी का बहुत ही सुंदर परिचय दिया। कृतित्व से लेखक का परिचय कराना आनंदित कर रहा है।

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