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हिंदी प्रेम कविता

क्या...याद है तुम्हे मेरे खयाल से पता नही पर लगता तो है कि याद होगा तुम्हे    आज से दो साल पहले   इसी दिन मिलेते हम  दिवार के पास यशवंत कॉलेज मे यह तो...याद होगा तुम्हे   लगता तो है कुछ खास नही   पर छेड दी थी,हमने ही बात शायद तुमने भी मौन रख कर दिया था जबाब यह पक्का याद है मुझे      फिर कुछ दिन चुप करहकर     हुऑ था धिरे धिर बातो का    सिल सिला शुरु   लगता है यह तो याद होगा ही तुम्हे फिर मिलना जुलना दिल खोलकर बाते करना कभी कभी तेरा रुठ जाना और मेरा पंक्तीयॉ लिखकर तुम्हे मनाना     क्या यह सब याद है तुम्हे         

भाषा मे वर्तनी का महत्व

भाषा मे वर्तनी का महत्व बहूत माना जाता है जैसे सब्जी मे नमक का होता है घर मे मॉ और श्रंगार बिंदी का महत्व होता है     वैसे ही लेखन मे     लेखन मे वर्तनी का    महत्व होता है इसके बिना शब्द अर्थ हिन होते भाषा का सौदर्य निकल जाता         ध्यान दो वर्तनी पर         तो उच्चारण में और         लेखन मे होगा सुधार. ..

बारिश कें दिनो मे...कविता

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बारिश कें दिनो मे गाती चिडियॉ  कवि मारोती गंगासागरे नाचते मोर देखकर हरी- हरियाली हम भी मचाते शोर           बारिश कें दिनो मे           लहराती हुई फसलें           देखकर जाग उठे           किसानों के सपने          हम ही है शामिल अपने सपनों मे बारिश कें दिनो मे धूम मचाती नदी उसमे है मछलियों कि छवि कभी यहॉ तो कभी वहॉ दिखाती अचानक कहॉ गायप हो जाती             बारिश कें दिनो में             सारा जहॉ भी हैं मस्ती मे             देखकर सबकी हँसी             जाग उठी यह सोई धरती             बारिश कें दिनो में....

बारिश पर कविता

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मैं बारिश के संग झूमने आयी हूँ.. मैं बारिश के संग झूमने आयी हूँ.. बारिश के संग हवा भीझुमने लगी है मेरे कानों मे आके बन गया क्या मेरा दिवाना कहेने लगी है     बारिश के संग हवा भी झूमने लगी है मस्ती मै आके मूझे कहने लगी है क्यों उदास है, तू कहे तो मनाउ क्या उसे तेरे दिल का हाल मे रे मूह से बताऊ मै बारिश के संग झूमने आयी हूँ यूही जाते जाते उसे बताके जाती हूँ तू चिंता न कर   ऐ बारिश उसे भिगोएगी और मै उसके तन-मन को बहेकाउँगी   जाते जाते तेरा यह काम करके   जाती हूँ मै बारिश के संग झूमने आयी हूँ  उसे बारिश के संग हवा भी झुमने लगी है मेरे कानों मे आके बन गया क्या मेरा दिवाना कहेने लगी है     बारिश के संग हवा भी झूमने लगी है मस्ती मै आके मूझे कहने लगी है क्यों उदास है, तू कहे तो मनाऊँ क्या उसे तेरे दिल का हाल मेरे मूह से बताऊ क्या उसे मै बारिश के संग झूमने आयी हूँ यूही जाते - जाते उसे बताके जाती हूँ तू चिंता न कर   ऐ बारिश उसे भिगोएगी और मै उसके तन-मन को बहेकाउँगी   जाते-जाते तेरा यह काम करके   जाती हूँ... मै...

Love poem monwart

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मारोती गंगासागरे    कोई तो बात होगी तभी रखा है तुमने मौन व्रत      यूही ऐसे कभी नही रखती      किस खुशी मे रखा है       तुमने यह मौन व्रत क्या मुझे बता पाओगी पता है व्रत टूट जाएगा तो इशारो मे समझाओगी क्यों रखा है तुमने मौन व्रत        क्या बता पाओगी         मै भी यह मौन व्रत रखू क्या ?        तुम्हारे खुशी मे शामिल होने के लिए       तुम्हारे नि:शब्द कथनो मे       मेरे शब्द कथित करने के लिए       मै भी रखू क्या मौन व्रत...

Love story paheli bar

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      पहेली बार, लेखन मारोती गंगासागरे                              मेरे जिंदगी के विस साल बित चूँके है | मै नांदेड शहर के सबसे बड़े यशवंत महाविद्यालय मे बी ए  lll year     मेरे जिंदगी के विस साल बित चूँके है | मै नांदेड शहर के सबसे बड़े यशवंत महाविद्यालय मे बी ए  lll year था , मेरे कॉलेज मे बहूत से दोस्त और सहेलियॉ भी थी | हम सब मिलजुलकर रहते थे | हम सभी की परीक्षाऐ  हो चूँकी थी  गर्मीयों कि छुट्चीयॉ  थी | और हम सब एक - दूसरे से दूर जा रहे थे | तो मै भी मेरे गॉव आया मगर  मन मे हमेशा बेचैनी और उदासी रहती थी | क्यों कि मुझे मेरे क्लास की वह भोलिसी सुरत याद आ रही थी | जिसे देखकर मैने खुद को पहचान लिया था | बाते तो हो रही थी, मगर पहले से कम, तो मैने उसे एक दिन कॉल किया और मिलनेका आमंञण दिया, तो उसने भी गिडगिडाते स्वर मे , " क्यों किस लिए मिलना है, अभी तो बात हुयी| ", " देखों वैसा नही तुम जो सोचती हों... पर पता नही क्यों तूम्हें देखने को दिल करता है , आ जाओं ना....

क्या करोगे

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जब सें शुरू हुयी है जिंदगानी तब सें ऑखों मेरे पानी अब तुम ही बताओं सुनकर क्या करोगें मेरी कहानी        जिसके साथ किया था      शुरू सफर जिंदगी का      वही छोड चला दूनीयॉ दारी      अब तुम ही बताओं कैसें बताऊँ मैं मेरी कहानी बताऊँ तों  ऑखों में पानी आ जाता इंन्कार करूँ तों तूम रूठ जातें सुनकर थोडी सी इंन्सानीयत ही दिखाओगें ,बोलों और क्या करोगें                              मारोती गंगासागरे..