बारिश पर कविता

मैं बारिश के संग झूमने आयी हूँ..
मैं बारिश के संग झूमने आयी हूँ..

बारिश के संग हवा भीझुमने लगी है
मेरे कानों मे आके
बन गया क्या मेरा दिवाना कहेने लगी है
    बारिश के संग हवा भी झूमने लगी है
मस्ती मै आके मूझे कहने लगी है
क्यों उदास है, तू कहे तो मनाउ क्या उसे
तेरे दिल का हाल मे रे मूह से बताऊ मै बारिश के संग झूमने
आयी हूँ यूही जाते जाते
उसे बताके जाती हूँ
तू चिंता न कर
  ऐ बारिश उसे भिगोएगी
और मै उसके तन-मन को बहेकाउँगी
  जाते जाते तेरा यह काम करके
  जाती हूँ
मै बारिश के संग झूमने आयी हूँ
 उसे
बारिश के संग हवा भी झुमने लगी है
मेरे कानों मे आके
बन गया क्या मेरा दिवाना कहेने लगी है
    बारिश के संग हवा भी झूमने लगी है
मस्ती मै आके मूझे कहने लगी है
क्यों उदास है, तू कहे तो मनाऊँ क्या उसे
तेरे दिल का हाल मेरे मूह से बताऊ क्या उसे मै बारिश के संग झूमने
आयी हूँ यूही जाते - जाते
उसे बताके जाती हूँ
तू चिंता न कर
  ऐ बारिश उसे भिगोएगी
और मै उसके तन-मन को बहेकाउँगी
  जाते-जाते तेरा यह काम करके
  जाती हूँ...
मै बारिश के संग झूमने आयी हूँ

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