बिना शस्त्र की लढाई हैं यह कोरोना...





      आज वर्तमान में सारे विश्व मे अतंग कोरोनाने मचाकर  सभी को अपने वश में किया हैं | फिर भी  सभी  तरफ लाँकडाउन  जारी किया हैं | तो  सारी जनता भी इस बंद में सहयोग दे रही हैं अब किसी-किसी जगह पर कोरोना नाकाम होकर हार मान रहाँ है | ऐसे हालात में पहले जिन इलाके में कोरोना का एक भी पेशंट नही था उस जगह पर अभी  कोरोना की संख्या बढ़ रही हैं | इसका उदाहरण देखा जाए तो नांदेड़
शहर में पहले कोरोना की एक भी केस नही थी तो अब एक हप्ते में कोरोना पेशंट की संख्या  पचास के ऊपर हुई हैं |
       इस पर अभी तक कोई भी प्रतिरोध करने वाली दवाई नही निकली तो इसका इलाज सभी अपने घरों में रहो यही एक मात्र इलाज हैं | इस दौरान सभी देशवासियों ने भी  अच्छा सा संयोग दिया मगर फिर भी कोरोना का बढ़ता हुआँ अतंग कम नही हुआँ | कहाँ जाऐ तो जहाँ सबसे पहले हालात गंभीर थे , उस जगह पर हालात सुधर रहे हैं | और जहाँ पहले अच्छे थे, वहाँ हालात बिगड़ रहे हैं | फिर भी सभी  विश्व मे हमारे देश की स्थिति अच्छी हैं ऐसा कहना हमारे भारत देश के लिए गर्व की बात हैं| सभी विश्व के वैज्ञानिक कड़ी मेहनत कर कोरोना का प्रतिरोध करने की दवाई निकाल ने में रात-दिन मेहनत कर रहे हैं और किए हुए दवाईयोका प्रशिक्षण जारी हैं |
         इसी दौर में  महानगरों में जो हर रोज कमाकर खुद का  और घरवालों का पेट पालते थे | इन सामान्य जनता के हालात गंभीर है | क्यों कि यह कोरोना से नही मगर भुख  से परेशान है | बड़े महानगरों में बहुत से मजदूर  दिन भर मेहनत करते हैं तभी रात में उनका चूल्हा जलता हैं | ऐसे में रिक्शा चालक औए छोटी- चाय की दुकानें चलाने वालो की संख्या ज्यादा है | इस समय उनका जो रोजी- रोटी देने का साधन था वह बंद हुआँ हैं | इस दौरान घर मे  कमाया हुआँ अनाज भी खत्म हो रहाँ हैं | माना कि सरकार ने सभी को मुफ्त में पांच की लो अनाज देने का ऐलान किया हैं | कहि जगहों पर दिया भी हैं मगर सही में यह अनाज एक इंसान को एक महीने तक का गुजारा करने में मददगार होगा क्या? यह सवाल भी जनता के सामने हैं
ऐसे हालात होकर भी जनता अपने घरों में बंद रहरकर कोरोना को हराने में  मदद कर रही हैं |
         कहाँ जाए सामान्य जनता का हाल इस प्रकार हुआँ हैं |
                 
                          "अरे कोरोना तूने यह क्या कर दिया
               बाहर निकलना मुश्किल और घर मे कैद  कर दिया
           मेहनत से कमाया अनाज हमने घर बैठे खत्म कर दिया
          अरे भाई कब जाएगा बोल जीना मुश्किल हो गया..!"

        यह एक महामारी न होकर युद्ध हैं इस युद्ध मे युद्ध करने वाले डॉक्टर सबसे बढ़े सैनिक हैं| यह कहना सबसे उचित हैं क्यों कि कोरोना पेशंट को ठीक करने के लिए रात - दिन हमारे विश्व के सभी डॉक्टर बिना किसी शस्त्र के लढ़ रहे हैं | इस सामूहिक युद्ध मे कहि डॉक्टरो की मौत भी हुई हैं ऐसे शहीद वीर को मेरा प्रणाम हैं | इसके साथ जो दूसरे महत्वपूर्ण सैनिक हैं वह हैं पुलिस यह जो लाँकडाउन में सभी को अपने- अपने घरों में बैठने के आदेश मिले हैं फिर भी मेरा पुलिस भाई सभी की रक्षा के लिए  गल्ली-चौराहे पर रात- दिन खड़ा हैं | सरकार ने लोगो की भलाई के लिए यह बंद किया हैं | फिर भी कहि- कही लोग अंदर बैठने के लिए तैयार नही हैं | जिन्हें पुलिस संभाल रही हैं |
         अतः में मैं इतना ही कहना चाहता हूँ कि अब खुद की रक्षा खुद के हाथ मे हैं | अपने-अपने घरों में रहिए तो स्वस्त जीवन पाओगे नही तो क्या होनेवाला हैं तो बतानेकी आवश्यकता नही है | इस हालात में एक दूसरे से दूरी बनाए रखे
यह दूसरा सबसे अच्छा और कोई भी कोरोना को हराने में इस का प्रयोग कर सकता हैं ऐसा शस्त्र हैं...
       लढना हैं अब हमें कोरोना से
        घर मे बैठेंगे खिड़की दरवाजे बंद कर
         नही हैं इसका कोई अबतक
          प्रतिरोध करने वाला शस्त्र
          तो हम यही शस्त्र इस्तमाल करेंगे
          घर मे बंद रहकर कोरोना को
          भगायंगे...
           
     लेखक मारोती गंगासागरे
                नांदेड़ महाराष्ट्र से
                8411895350
       

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