क्या तूम जानती हो...


    मारोती गंगासागरे
क्या तुम जानती हो कही 
धुप है तो कही छॉव
है कोयी तुम्हारे बेतरार
मै जानता हूँ तुम्हारी बेचैनी
 समझता हूँ तुम्हारी देह बोली
 क्या मेरी तरहॉ तूम भी
समझ सकती हो...
बोलो ना क्या तुम जानती हो...

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