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होली आयी रे

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होली आयी रे (कविता) होली  आयी रे ,  होली  आयी रे, मुझे गुलाल लगाने भाभी आयी रे‌। सब  को  होली में  बहुत बधाई रे, होली  में है  सब  की  परछाई  रे। धूम - धाम  से मैं  होली मनाऊं रे, अबीर  लगाने  प्रिय को बुलाऊं रे। आज खूब शुभ-शुभ दिन है हरपल रे, हर घर- आंगन,सड़क पे है हरचल  रे‌। पुआ खाकर अब होली मनाओ रे, पिचकारी  लेकर  यहां  आओ रे। रोचक  प्यारी  है  होली  के  दिन रे, मन नहीं लगता आज प्रिय के बिन रे। होली  के  दिन  मेहमान  आया रे, और  थैला  में  पकवान  लाया रे। सब से प्यार करें इस होली में रे,  रंग - अबीर सब रखों झोली में रे।    अनुरंजन कुमार "अंचल"      साहित्यिक नाम      कुमार "अंचल"        कवि/शायर        अररिया, बिहार       7488139688

जल और वृक्ष

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जल और वृक्ष अलका जैन जल है तो जीवन यार दोस्त वरना बंमाड में जीवन कहां शबनम की बूंद सी प्यास हमारी बहा रहे दरिया बेकार बेमक़सद सावन में जो सहेजें जल पानी छत का पानी रोक वहीं सयाना बरसात  देती पानी प्यासी धरती को सावन में जो चाहो  जल बरसे  यारो निमंत्रण देने बरसात को वृक्ष लगा जल उपर से नहीं सोना बरसे यारो किसन की मेहनत रंग लाये पैसा जब बाजार में तब जाकर आये यार पानी बने सोना जब प्यापारी हर्षाते गांव गांव गली गली में लक्ष्मी आती जल कीमत अनमोल राज जान ले किसी प्यासे पूछ पानी कितना  मोल बूंद बूंद पानी देता जीवन जीवन को  बूंद बूंद टपके पानी नल से दोस्त तब निचे बर्तन रख बचत कर जल खोल नल व्यर्थ ना बहा जब दांडी बने बरसात का पानी का मिजाज बिगड़े तब तबाही आती कैसी कैसी सब जाने संकलित पानी ग्लेशियर में सदियों से गर्मी बड़े तब पिघलते ग्लेशियर संसार में तबाही आती मचे  बर्बादी हर ओर सखी गर्मी कम हो मंदिर मस्जिद नहीं जंगल बना बचे तौ धर्म भी खूब चर्चा होगी फिलहाल पैड लगा अस्तित्व बचा आपना ओर अन्य जीव का  हम तुम मिल कर  गुलशन लगाये बाग वृक्ष ना काटे हरा-भरा कोई...

आप सभी को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएं*।

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*आप सभी  को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएं*। *नारियां शक्तियां हैं शक्तियां नारियां* *हैं परम ब्रह्म की मधुमयी शक्तियां*। *शक्तियां हैं नारियां, नारियां हैं शक्तियां* *हैं परम ब्रह्म की मधुमयी शक्तियां* *खुद जगें और सबको जगाती चलें,* *तम मिटाती चलें पथ बनाती चलें* *रोशनी की हों ज्यों वे लिखी पंक्तियां* *नारियां शक्तियां हैं, हैं शक्तियां नारियां* *हैं परम ब्रह्म की मधुमयी शक्तियां*। *हैं पहुंचने लगीं अब तो आकाश तक*, *जीतती हैं हृदय और विश्वास तक* *हैं चेतना की वे सुंदर सजग लहरियां* *हैं परम ब्रह्म की मधुमयी शक्तियां* *आइए हम सभी साथ मिलकर चलें* *जीतलें हम हृदय हम जिधर भी बढ़ें* *हम सृजनशील हों हम लिखें और पढ़ें* *हम विधाता की हैं दिव्य सी दृष्टियां* *नाम रोशन करें हम मधुमयी शक्तियां* *हैं नारियां शक्तियां, शक्तियां हैं नारियां* *हैं परम ब्रह्म की मधुमयी शक्तियां* *हर अंधेरा मिटे और सवेरा बढ़े* *रात गहरी न हो दिन सदा ही चढ़े* *हाथ में खड्ग लें देवी दुर्गा बने* *हो जरुरत जहां चंडिका बन लड़ें* *सृष्टि की मूल ये ब्रह्म की शक्तियां* *हैं नारियां शक्तियां शक...

शक्ति हूं मैं नारी हूं*

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*सभी नारियों को सादर सप्रेम समर्पित* *शक्ति हूं मैं नारी हूं* नहीं अबला न ही बेचारी हूं। बरगलाओ न मुझे मैं पहचानती हूं अपनी शक्ति को जानती हूं। न जकड़ो मुझे मिथ्या आडंबरों में मैं परमात्म की अनुपम कृति उसी की  शक्ति बसती है मेरे स्वरों में। मैंअंश हूं उस अंशी का जिसने रची है समूची सृष्टि ,उसी परमात्म के दिव्य आलोक से आलोकित है    मेरा मन, नहीं शामिल मैं लोभियों, पाखंडियों और पामरों में। क्योंकि मानवी हूं मैं चिर मानवता ही मेरा सजीला ख्वाब। समझो न मुझको भार,ईश का वरदान हूं नायाब।। समझो नहीं भार हूं मैं शक्ति हूं सिरजनहार हूं मैं। अपनी आभा से प्रकाशित कर रही हूं विश्व सारा। मधुमयी हूं  प्रेम से  बढ़ती ‌सदा ही भेदती हूं मैं सदा ही नफरतों की सघन कारा।       डॉ मधु पाठक ,राजा श्रीकृष्ण दत्त स्नातकोत्तर महाविद्यालय जौनपुर उत्तर प्रदेश।

नारी को अधिकार मिले

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नारी को अधिकार मिले जब से नारी को नारी का, सम्बल मिलना शुरु हुआ। वसुधा से उठकर नारी ने, हाथों से आकाश छुआ।। पग - बाधा बनकर नारी ने, नारी को  अक्सर  रोका। नारी ने इतिहास रचाया, जब भी उसे मिला मौका।। आँख खोलकर देख पाँव अंगद- सा जमां जमीं पर है। और  हाथ  में  सीढ़ी अथवा, सीढ़ी ही  दोनों  कर है।। धरती से अम्बर तक नारी, अथवा जग नारीमय है। अवध नारियों से ही उन्नत,नर - नारी है, किसलय है।। इसीलिए अब से नारी को, नारी का अधिकार मिले। पतझड़ से व्याकुल उपवन को, पावस का उपहार मिले।। मानवता के लिए स्वयं का, अहंकार अर्पण कर दें। पौरुष के शुभ नवाचार को, मनुज हेतु दर्पण कर दें।।    डॉ. अवधेश कुमार अवध मेघालय 8787573644

महिला दिन पर खास महिला की पीड़ा

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औरत जो  प्रवस पीड़ा सहने उसे कैसे पुकारा अबला जो मनुष्य का पहला गुरु उसे कैसे पुकारा मंदबुद्धि पन्ना धाय तुच्छ पद पर कर रहे कर रच गई इतिहास बुध्दि पर उसके मान करें इतिहास  दो बारात आ गई एक राजकुमारी की जान दे अपनी मीरा की बहन ने लोगों युद्ध रोका पढ़ लो इतिहास को दोस्तों जान ले नहीं सकती तो जान दे कर किया कमाल खिलजी से युद्ध हुआ राजा  हाय हारा रानी पद्मावती ने जोहर कर शुन्य करी दुश्मन की जीत को सब जाने जोहर औरत जान ले नहीं सकती दे कर जोहर करें जान लेने में रही कई औरतें माहिर रानी लक्ष्मीबाई बाई या हो रजिया जीजा बाई की शिक्षा से बने शिवाजी शबरी ने जुटे बैर खिला राम का प्यार मान पायै क्या नहीं पाया शबरी ने लोगों औरत जान ले नहीं सकती दे सकती कोई आख बांध समय की रीत निभाये कुछ औरतें बुरी कहलाती मंथरा दासी शुपडखां भी उनमें से कुछ नाम है यार पुतली बाई फूलन देवी डाकू बन बैठी दुसरी ओर मीरा ने भजन लिखे अनमोल सुनो सुभद्रा कुमारी चौहान ने किया कलम से कमाल वर्तमान में अब झांके हम अपने लोगों कल्पना चावला ने अंतरिक्ष में कमाल की बुद्धि रख  चकित हुआ सारा विश्व इंदिरा गांधी प्रधानमंत्...

*फणीश्वर नाथ रेणु*•••••••••••••

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*फणीश्वर नाथ रेणु* ••••••••••••• धन्य हुआ अररिया जन्मा,  फणीश्वर महान,   सर जमीन बिहार की,   तुम्हें शत शत प्रणाम। साहित्य के आकाश में, चमकता हुआ एक नाम,  सीधी सरल सहज भाषा, रचना‌ बडी  बेमिसाल। जुड़ा जमीन से इक कवि,पला अंचल की छांव,  देश का नाम किया रोशन,धन्य अररिया गांव। आंदोलन का हिस्सा बनकर नेता भी कहलाए आजादी की लड़ाई लड़ाई देश स्वतंत्र कराएं। मैला अंचल जीवन में, उजाला भर गया,   पद्मश्री उपाधी पायी,अमरत्व दिला गया। धन्य है फणीश्वर रेणु,तेरी कलम की उचाईंया, याद करेंगी जिनको, जाने कितनी सदियां।। ******************** सुखमिला अग्रवाल’भूमिजा’  स्वरचित मौलिक  सर्वाधिकार सुरक्षित  मुंबई ******************************************** अपना साहित्य निःशुल्क प्रकाशित करने के लिए हमे मेल कोजीए marotigangasagare2017@gmail.com