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मई, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

नई दुल्हन कविता

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नई दुल्हन नई नवेली दुल्हन थी ओ नया था उसके लिए घर आँगननई नवेली दुल्हन थी ओ नया था उसके लिए घर आँगन सभी चेहरे  खुश थे , बस वही थी निराशा से मन मे माँ की यादे आती मन ही मन रो लेती...          नई नवेली दुल्हन थी ओ          नया - नया था, यौवन         अभी कली खिल ही चुकी थी         ना देखी उसकी खुशी         पढ़ने-लिखने के दिन थे         तो बना दी नई दुल्हन यही रीत है इस समाज की ना देखे बेटी को... छीन लेते उसकी खुशी डाल देते संसार के अंदर ऐसे ही बना देते नई दुल्हन सभी चेहरे  खुश थे , बस वही थी निराशा से मन मे माँ की यादे आती मन ही मन रो लेती...          नई नवेली दुल्हन थी ओ          नया - नया था, यौवन         अभी कली खिल ही चुकी थी         ना देखी उसकी खुशी         पढ़ने-लिखने के दिन थे         तो बना...

प्यार भरा शेर

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मारोती गंगासागरे

सुंदर शेर और गीत

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     शेर   बीत गए हैं वह दिन यादे अभी भी बाकी हैं छूट गए  हैं हाथों से हाथ मगर छुवन अभी भी बाकी हैं ओझल हो गए नजर से वह फिर भी आँख में तस्वीर बाकी हैं             छंद अभी-अभी रात ढल चुकी हैं अभी तो सुबहाँ  हो चुकी हैं इश्कु का नूर उतरा तो  तन्हाई की बाते हो रही हैं बिता मौसम एक ही दिन में निकले हैं वह तो नए जहाँ में हवा भी बेदर्द ना हुई हैं ओ तो छोड़के जा चुके हैं             कविता मदमस्त हवा का झोका था आता- जाता रहता था कभी खुशी टी कभी गम दिखता था ऐसा ही मदमस्त हवा का झोका था             आया तो बहार था               गया तो बेहाल था             माना कि बेहद प्यारा था            ऐसा ही मदमस्त हवा का झोक...

प्यारी शायरी

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          तेरे मुहब्बत ने क्या-क्या बनाया मुझे           कवि, शायर, कहानीकार बनाया मुझे           प्यार छोड़कर सबकुछ दिया तूने मुझे           तेरे प्यार ने महशूर किया मुझे....                                 मारोती गंगासागरे

मातृव दिवस पर कविता

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      करो माँ को प्यार क्या बात लिखूँ मैं माँ बारे मे लिखना तो मेरे बस में नही शब्द कम पढ़ जाएंगेऔर उपमा तो कोई नही दे पाऊँ मैं इतना अच्छा मैं नही...            उसकी ममता उसकी माया             क्या बताऊँ मैं अभी             इतना बल मेरे कलम में नही             जो लिखें माँ की बातें... रात -दिन मेहनत कर मिझे उसने पाला हैं, वह भूखी सोई पर उसने डाँटकर खाना मुझे खिलाया हैं आज दो पैसे कमाकर क्या लाया मैं माँ को भूल क्यों गया...               यह अभी वर्तमान में भी                यही हाल माँ की हैं...                 उसने हमको खुद से ज्य...

पाँच प्रेम कविता

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       1   क्या देखतें हो... क्यों क्या देखते हो ऐसे आँखे खोलके ऐसें ना देखो मुझें बोलों ना क्या हैं मुझमें          चूप क्यों हों कहो ना...कब तक देखोगे           मुझें ऐसे...ना देखों           मेरे दिल का दरवाजा           खुल जाएगा... फिर तेरा निकलना मुश्किल हो जाएगा तो मेरे दिल में तू सफर का अप्साना बनकर रह जाएगा अब तो नजर हटाओ ना... नजर से मेरे...         मैं देखना नही चाहती         तुम्हारी आँखों को         पर क्या करूँ तुम्हें देखें बिना         आँखें नही रह पाती          पूछो ना...अब मुझे          क्यों बार-बार देख     ...

बिना शस्त्र की लढाई हैं यह कोरोना...

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      आज वर्तमान में सारे विश्व मे अतंग कोरोनाने मचाकर  सभी को अपने वश में किया हैं | फिर भी  सभी  तरफ लाँकडाउन  जारी किया हैं | तो  सारी जनता भी इस बंद में सहयोग दे रही हैं अब किसी-किसी जगह पर कोरोना नाकाम होकर हार मान रहाँ है | ऐसे हालात में पहले जिन इलाके में कोरोना का एक भी पेशंट नही था उस जगह पर अभी  कोरोना की संख्या बढ़ रही हैं | इसका उदाहरण देखा जाए तो नांदेड़ शहर में पहले कोरोना की एक भी केस नही थी तो अब एक हप्ते में कोरोना पेशंट की संख्या  पचास के ऊपर हुई हैं |        इस पर अभी तक कोई भी प्रतिरोध करने वाली दवाई नही निकली तो इसका इलाज सभी अपने घरों में रहो यही एक मात्र इलाज हैं | इस दौरान सभी देशवासियों ने भी  अच्छा सा संयोग दिया मगर फिर भी कोरोना का बढ़ता हुआँ अतंग कम नही हुआँ | कहाँ जाऐ तो जहाँ सबसे पहले हालात गंभीर थे , उस जगह पर हालात सुधर रहे हैं | और जहाँ पहले अच्छे थे, वहाँ हालात बिगड़ रहे हैं | फिर भी सभी  विश्व मे हमारे देश की स्थिति अच्छी हैं ऐसा कहना हमारे भारत देश के लिए ग...