प्रेम प्रक्रति की बहू मूल्यदेन हैं...
प्यार होना यह एक प्रकृति का अहसास है मानो लाइफ टर्निंग पॉइंट हैं | क्यों कि जीवन पूरा बदल जाता हैं किसीका अच्छा तो किसीका बुरा हाल होता जैसा ही हो जीवन बदल जाता हैं | ऐसा कहना ही उचित होगा साथ ही प्रकृति भी हमे मदद करती हैं | प्यार होने से पहले जिसेभी हम चाहते हैं उसके प्रति एक आकर्षण सा निर्माण होता हैं उसी के बारे में सोचना , उसी के ख्यालो में रहना कितना ही मन मे ठान लो कि मैं उसे याद नही करूँगा मगर याद आती हैं | यह जो आकर्षण हैं यह मन मे उठने वाले तरंग हैं और इसे प्रकृति अपने आप उत्तेजित करती हैं साथ ही सही समय पर यह अवस्था निर्माण होना यह भी प्रकृति का ही एक तोहफा कह सकते हैं | धीरे- धीरे यह आकर्षण बढ़ता रहता हैं तो उसे मिलना , बातें करना अच्छा लगता और यह आकर्षण ही बाद में प्यार में रूपांतरित होता यदी हम इस आकर्षण को प्यार में बदलना चाहतें हैं यह भाव प्रकृति अपने आप आपके अंदर भर देती हैं और सामने वाले को भी इस भाव से परिचित करती हैं | कहने का मतलब आकर्षण ही प्यार की प्रथम सीढ़ी हैं ऐसा कहना गलत नही हैं |
प्यार का इजहार करने से पूर्व भी प्रकृति हमे कुछ इशारे करती हैं या कुछ चिन्ह दिखती हैं जैसे कि रह हवा का झोंका प्यारा लगे और खुशी का मौहल निर्माण हो जाना , कहाँ जाए तो एक जोश , उत्साह रगों में होता हैं यह सब प्रकृति की ही देन हैं | कहाँ जाता हैं कि प्रकृति हमे सकारात्मक और नकारात्मक ऐसे दोनों ही संकेत देती बस उसे समझना पड़ता हैं कहाँ जाए तो आपको प्यार का इजहार करना हैं जैसा सोचा तो और कुछ मन की स्थिति खुद को अछि लगी तो याने अंदर से कुछ खुशी महेसुस हुई तो यह प्रकृति का अच्छा संकेत हैं ऐसे समझे और मन के भाव इसके विपरीत हुए तो बुरे संकेत समझे
कहाँ जाए तो नैव रस हैं और उस नैव रस में प्रथम स्थान पे या रसों राजा श्रंगार रस माना जाता हैं क्यों कि इस के उतपति में इंसान इंसान बनता हैं | यदी कोई साहित्य कर इस अवस्था मे आता हैं तो वह अपने रचना में वह श्रंगारिक्ता के भाव दिखता याने की प्रेम होना यह एक प्रकृति की बहुमूल्य देंन हैं यह कहना उचित हैं |
यहाँ मैंने प्रेम को एक वासना या स्वार्थ के दृष्टि से चित्रित नही किया यडी इसमें स्वार्थ भाव उत्पन्न होते हैं तो यह प्रेम प्रकृति की देन नही कह सकते क्यों कि यहाँ एक भावना को पूर्ण करने के लिए ही देखा जाता हैं और वह पूरा होने के बाद...
अंतः में मैं इतना ही कहता हूँ कि प्रेम एक प्रकृति की बहुमूल्य देन हैं और इसमें लाइफ टर्निंग पॉइंट बनता ही हैं यह सौ प्रतिशत सही हैं फिर वह अच्छी तरह की हो या बुरे तरह की हो मगर जिंदगी बदलती हैं यह मैं दावे के साथ कहता हूँ यदी अपने पूरे तन-मन, निष्ठा से प्रेम किया तो ही टर्निंग पॉइंट बन सकता हैं ऐसे वैसे के इसमे नही....|
लेखक मारोती गंगासागरे
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