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पर्यावरण

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पर्यावरण तरुवर अति पावन,बहुत सुहावन,यह बहु बिधि सुखकारी l कुछ पौध लगाओ,रोग भगाओ,हो विकसित फुलवारी ll छाया मन भाये,मेघ बनाये,हर्षित नर अरु नारी l धरती मुसकाती,कोयल गाती,फल से नत तरु भारी ll आक्सीजन दाता,नेह लुटाता,वृक्ष देव कहलाते l हम पूजें इनको,रजनी दिन को,रक्षा तिलक लगाते ll दीनों की आशा,जन्तु निवासा,राहगीर पुनि आते l ये   रैन   बसेरा, सबका  डेरा,पा आश्रय  हरषाते ll ये भगवन दूजा,कर लो पूजा,पर्यावरण सुधारो l कर  इनकी सेवा,पाओ मेवा,इन पर निज को वारो ll ऋगुवेद   सुनावे,जन   जन गावे,दस  पुत्रों सम धारो l यह कर्म पुनीता,वेद सुनीता,जीवन जन्म सँवारो ll डॉ अवधेश कुमार 'अवध' 8787573644

रिश्तें निभाने हैं तो सिखों इन चीजों को

          रिश्तें निभाने हैं तो सिखों इन चीजों को :::::::::::::::::::::::::::::: :::::::::::::::::::::::::::::: :::::::::::::::              आज जो भी अपने रिश्तें को , रिलेशनशिप को बेहतर बनाना चाहता हैं | चाहें वह लड़का हो या लड़की , महिला हो या पुरुष किसी भी उर्म का शख्स निम्नलिखित बातों को ध्यान से पढ़कर अपने रिश्तें में  अप्लाई करता हैं तो वह रिश्तेदारी का सम्राट बन जाएगा |               मनुष्य जीवन में  रिश्तों को काफी अहमियत हैं | क्यों कि हर इंसान का व्यवहार , बर्ताव तथा सामाजिक दायरा यह सब रिश्तेंदार तथा समाज के लोग तय करते हैं | प्रत्येक इंसान अपनी जिंदगी में कितने रिश्तें बनाता हैं , तोड़ता हैं | सुना हैं कि रिश्तेंदारी की दुनियाँ जिसने सीखी उसने तो जिंदगी सीखी | आज- कल कॉलेज लाईफ में न जाने कितने दोस्त मिलते हैं , कितने रिश्तें बनते हैं | मगर उसे निभाना हर किसी को कहाँ आता हैं | उदाहरण कहाँ जाएँ तो एक छोटीसी स्टेपलर पिन अनेक कागजो को एकत्रित , सभी ...