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लोग क्यों हार कर बैठते निराश

लोग क्यो हार कर बैठते निराश        वे जानते नही आनेवाली है रात       ढल जाऐगा अँधेरा होगी दिन की शुरुवात       आयगी ऑगन में खूशीयों कि बारात                  लोग क्यों हार कर बैठते निराश                  जो है उसका हँसकर स्विकार करो                  आज नही तो कल आपकी हार जित बन जाऐगी                  या नयी सिख दे जायगी इसका इंन्तजार करो     लोग क्यों हार कर बैठते निराश    हार कर निराश ना बन जाओं     वही मंजील रास्ता नया तलाश करो     हो जाऐगी दूगनी खूशी हार कर जितनेती                  बस!यही याद रखो                  एक दिन हार कर मंजील                  कदमो मे गिर जाऐगी ...

होली का त्योहार आया

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मारोती गंगासागरे खेतो में गेंहू की फसले पक्क गई सरसो के फुल सुखने लगे पलाश भी पञ हीन होकर ,फुलो से सज गया मानो प्रकृती पर नया योवन छा गया इसीलिए आज खुशीयॉ लेकर होली का त्योहार आ गया              सर्दी की छुट्टी हुई, गर्मी का आगमन हुआँ               सुरज भी बन गया देखो               धरती का दुश्यमन...               ऐसे मे बुरे शक्ती को जलाकर                भस्म करने के लिए                होली का त्योहार आ गया बिघडी बात को सुधारने रिश्तो को मजबूत बनाने हर मन के व्देश को जलाकर हल्की सी सुगंध फैलाकर जीवन मे प्यार का रंग भरने के लिए देखो होली का त्योहार आया खेतो में गेंहू की फसले पक्क गई सरसो के फुल सुखने लगे पलाश भी पञ हीन होकर ,फुलो से सज गया मानो प्रकृती पर नया योवन छा गया इसीलिए आज खुशीयॉ लेकर होली का त्योहार आ गया        ...