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सौंदर्य तेरा

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 सौदर्य तेरा सुबह की सूरज की किरणें    तेरे गालो पर आके       गोरे रंग को सताती है           तो तू और भी सुंदर नजर आती है कोहरा झील-मिलसा चारों ओर है       उस की बूंदों में खड़ी तू           पैरों तले हरियाली हँस पड़ी है              उपर तू खड़ी है इसलिए वह भी डोलती है उपर से खग  जाते तेरे     तेरे चोटी का गुलाब देख         वह भी कुछ पल रुक जाते              तेरे सौदर्य को वह भी अपना ना चाहते तू शबनम में हाथ फैलाए      मुस्कान भरी उपर देख           मस्ती में खग बन ना चाहती तू                    हवा भी तेरे सौदर्य की सुंगध लेके                        मेरे कानों में आके सताती है                     ...